श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.184.46 
तत: कुमुदनाथेन कामिनीगण्डपाण्डुना।
नेत्रानन्देन चन्द्रेण माहेन्द्री दिगलङ्कृता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कामातुर स्त्रियों के कपोलों के समान श्वेत और पीत वर्ण वाले सुन्दर कुमुदनाथ चन्द्रमा पूर्व दिशा की ओर शोभायमान हुए॥46॥
 
After that, the beautiful Kumudnath moon, having white and yellow complexion like the cheeks of lustful women, adorned the eastern direction. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)