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mahabharat 7.184.40: नींद से अंधे हाथी धूल से सनी अपनी सूँडों से लम्बी साँसें छोड़कर सर्पों की तरह पृथ्वी को ठंडा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.184.40 
गजास्ते पन्नगाभोगैर्हस्तैर्भूरेणुगुण्ठितै:।
निद्रान्धा वसुधां चक्रुर्घ्राणनि:श्वासशीतलाम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
नींद से अंधे हाथी धूल से सनी अपनी सूँडों से लम्बी साँसें छोड़कर सर्पों की तरह पृथ्वी को ठंडा करने लगे।
 
The elephants, blinded by sleep, began to cool the earth like serpents by letting out long breaths from their trunks covered in dust.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)