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mahabharat 7.184.4: आप शत्रुओं को पीड़ा देने वाले हैं और द्रोणाचार्य का नाश करने के लिए ही अग्निकुण्ड से बाण, कवच, तलवार और धनुष सहित उत्पन्न हुए हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.184.4 
त्वं हि द्रोणविनाशाय समुत्पन्नो हुताशनात्।
सशर: कवची खड्गी धन्वी च परतापन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आप शत्रुओं को पीड़ा देने वाले हैं और द्रोणाचार्य का नाश करने के लिए ही अग्निकुण्ड से बाण, कवच, तलवार और धनुष सहित उत्पन्न हुए हैं॥4॥
 
‘You are the one who torments the enemies and you have been born from the fire pit along with your arrows, armour, sword and bow just to destroy Drona.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)