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mahabharat 7.184.36: ‘कुन्तीनन्दन! आपकी प्रेरणा से हम लोग विश्राम पाकर सुखी हो गए हैं; अतः हम आपके कल्याण की कामना करते हैं। आप सुख प्राप्त करें। वीर! आप शीघ्र ही अपने मन को प्रसन्न करने वाली वस्तुएँ प्राप्त करें।’॥36॥   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.184.36 
यच्चाश्वस्तास्तवेच्छाम: शर्म पार्थ तदस्तु ते।
मनसश्च प्रियानर्थान् वीर क्षिप्रमवाप्नुहि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
‘कुन्तीनन्दन! आपकी प्रेरणा से हम लोग विश्राम पाकर सुखी हो गए हैं; अतः हम आपके कल्याण की कामना करते हैं। आप सुख प्राप्त करें। वीर! आप शीघ्र ही अपने मन को प्रसन्न करने वाली वस्तुएँ प्राप्त करें।’॥36॥
 
‘Kuntinandan! We have rested and become happy due to your inspiration; therefore we wish for your well-being. May you attain happiness. Brave! May you soon obtain the things that please your heart.’॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)