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mahabharat 7.184.33: हे भरतवंशी राजा! हे भरतकुलभूषण! अर्जुन के क्रूरता न करने के वचन का आदर करके सारी थकी हुई सेनाएँ दो घड़ी तक सोती रहीं॥33॥   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.184.33 
तत् सम्पूज्य वचोऽक्रूरं सर्वसैन्यानि भारत।
मुहूर्तमस्वपन् राजञ्श्रान्तानि भरतर्षभ॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी राजा! हे भरतकुलभूषण! अर्जुन के क्रूरता न करने के वचन का आदर करके सारी थकी हुई सेनाएँ दो घड़ी तक सोती रहीं॥33॥
 
Bharatvanshi king! Bharatkulbhushan! Respecting Arjuna's word of no cruelty, all the tired armies slept for two hours. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)