Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.184.3: जब उन्होंने देखा कि भीमसेन द्वारा आपकी विशाल सेना का विनाश किया जा रहा है, तब उन्होंने धृष्टद्युम्न से कहा, 'हे वीर, द्रोणाचार्य को आगे बढ़ने से रोको।'   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.184.3 
दृष्ट्वा भीमेन महतीं वार्यमाणां चमूं तव।
धृष्टद्युम्नमुवाचेदं कुम्भयोनिं निवारय॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने देखा कि भीमसेन द्वारा आपकी विशाल सेना का विनाश किया जा रहा है, तब उन्होंने धृष्टद्युम्न से कहा, 'हे वीर, द्रोणाचार्य को आगे बढ़ने से रोको।'
 
When he saw that your huge army was being destroyed by Bhimasena, he said to Dhrishtadyumna, 'O brave one, stop Dronacharya from advancing.' 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)