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mahabharat 7.184.24: बहुत से लोग निद्रा से अत्यन्त मोहित होने के कारण युद्धस्थल में शत्रुओं द्वारा उन्हें मारने के लिए किए गए प्रयत्नों को समझ नहीं पाते थे ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.184.24 
हन्यमानमथात्मानं परेभ्यो बहवो जना:।
नाभ्यजानन्त समरे निद्रया मोहिता भृशम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग निद्रा से अत्यन्त मोहित होने के कारण युद्धस्थल में शत्रुओं द्वारा उन्हें मारने के लिए किए गए प्रयत्नों को समझ नहीं पाते थे ॥24॥
 
Many people, being extremely fascinated by sleep, were unable to understand the attempts made by their enemies to kill them in the battlefield. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)