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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना
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श्लोक 2
श्लोक
7.184.2
घटोत्कचे तु निहते सूतपुत्रेण तां निशाम्।
दु:खामर्षवशं प्राप्तो धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ २॥
अनुवाद
उस रात जब घटोत्कच को एक सारथी के पुत्र ने मार डाला, तो धर्मराज युधिष्ठिर दुःख और आक्रोश से भर गये। 2.
That night when Ghatotkacha was killed by a charioteer's son, Dharmaraja Yudhishthira was overcome with grief and resentment. 2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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