श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.184.14-15h 
त्रियामा रजनी चैषा घोररूपा भयानका॥ १४॥
सहस्रयामप्रतिमा बभूव प्राणहारिणी।
 
 
अनुवाद
उन्हें तीन घंटे की यह रात हजारों घंटों की रात के समान भयंकर, डरावनी और प्राणघातक प्रतीत हुई।
 
To them this night of three hours appeared as dreadful, terrifying and life-killing as a night of thousands of hours. 14 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)