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mahabharat 7.183.62: हे माननीय! यह बड़े हर्ष की बात है कि युद्ध में सूतपुत्र कर्ण ने उस राक्षस को मार डाला। वास्तव में काल ने इन्द्र की शक्ति का बहाना बनाकर उसे मार डाला था।   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.183.62 
दिष्टॺा रक्षो हतं युद्धे सूतपुत्रेण मानद।
वासवीं कारणं कृत्वा कालेनोपहतो ह्यसौ॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे माननीय! यह बड़े हर्ष की बात है कि युद्ध में सूतपुत्र कर्ण ने उस राक्षस को मार डाला। वास्तव में काल ने इन्द्र की शक्ति का बहाना बनाकर उसे मार डाला था।
 
O honourable one! It is a matter of great joy that in the war, Sutaputra Karna killed that demon. In reality, Kala killed him using Indra's power as an excuse. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)