Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.183.45-46h: इसी प्रकार अन्य महाधनुर्धरों ने युद्ध में सुभद्रा के पुत्र का वध कर दिया था। हे यादवश्रेष्ठ श्रीकृष्ण! अभिमन्यु के वध में जयद्रथ का दोष बहुत कम था, फिर भी गांडीवधारी अर्जुन ने उस छोटे से कारण के आधार पर जयद्रथ का वध कर दिया। मुझे यह कृत्य बहुत अच्छा नहीं लगा।' | mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथेतरे महेष्वासा: सौभद्रं युध्यपातयन्।
अल्पे च कारणे कृष्ण हतो गाण्डीवधन्वना॥ ४५॥
सैन्धवो यादवश्रेष्ठ तच्च नातिप्रियं मम।
अनुवाद
इसी प्रकार अन्य महाधनुर्धरों ने युद्ध में सुभद्रा के पुत्र का वध कर दिया था। हे यादवश्रेष्ठ श्रीकृष्ण! अभिमन्यु के वध में जयद्रथ का दोष बहुत कम था, फिर भी गांडीवधारी अर्जुन ने उस छोटे से कारण के आधार पर जयद्रथ का वध कर दिया। मुझे यह कृत्य बहुत अच्छा नहीं लगा।'
‘Similarly, other great archers had killed Subhadra's son in the war. O best of the Yadavas, Shri Krishna! Jayadratha had very little fault in the killing of Abhimanyu, yet Arjuna, the bearer of Gandiva, killed Jayadratha on the basis of that small reason. I did not like this act very much. 45 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥