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mahabharat 7.183.44: जब वह इस प्रकार संकट में पड़ा, तब कृतवर्मा ने क्रूर पुरुष की भाँति अचानक उसके घोड़ों तथा दोनों पार्श्वरक्षकों को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.183.44 
व्यसने वर्तमानस्य कृतवर्मा नृशंसवत्।
अश्वान् जघान सहसा तथोभौ पार्ष्णिसारथी॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब वह इस प्रकार संकट में पड़ा, तब कृतवर्मा ने क्रूर पुरुष की भाँति अचानक उसके घोड़ों तथा दोनों पार्श्वरक्षकों को मार डाला।
 
When he was thus in trouble, Kritavarman, like a cruel man, suddenly killed his horses and his two side guards. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)