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mahabharat 7.183.43: गुरु द्रोणाचार्य ने ही कर्ण को अभिमन्यु को मारने का उपाय बताया था और जब कर्ण तलवार से यत्नपूर्वक युद्ध कर रहा था, तब उन्होंने ही उसकी तलवार के दो टुकड़े कर दिए थे॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.183.43 
उपदिष्टो वधोपाय: कर्णस्य गुरुणा स्वयम्।
व्यायच्छतश्च खड्गेन द्विधा खड्गं चकार ह॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
गुरु द्रोणाचार्य ने ही कर्ण को अभिमन्यु को मारने का उपाय बताया था और जब कर्ण तलवार से यत्नपूर्वक युद्ध कर रहा था, तब उन्होंने ही उसकी तलवार के दो टुकड़े कर दिए थे॥ 43॥
 
Guru Dronacharya himself had told Karna the way to kill Abhimanyu and when Karna was fighting diligently with the sword, he himself had broken his sword into two pieces.॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)