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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.183.42 
निरुद्धाश्च वयं सर्वे सैन्धवेन दुरात्मना।
निमित्तमभवद् द्रोण: सपुत्रस्तत्र कर्मणि॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट जयद्रथ ने हम सबको सेना के बाहर ही रोक दिया था। वहाँ द्रोणाचार्य अपने पुत्र सहित अभिमन्यु के वध का कारण बने थे।
 
‘The evil-minded Jayadratha had stopped all of us outside the formation. There, Dronacharya along with his son were the reason for the killing of Abhimanyu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)