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mahabharat 7.183.41: हे भगवान् कृष्ण! जब युद्ध में धृतराष्ट्र के दुष्ट पुत्रों ने अभिमन्यु को मार डाला, उस समय महारथी अर्जुन वहाँ उपस्थित नहीं थे ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.183.41 
यदाभिमन्युर्निहतो धार्तराष्ट्रैर्दुरात्मभि:।
नासीत् तत्र रणे कृष्ण सव्यसाची महारथ:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान् कृष्ण! जब युद्ध में धृतराष्ट्र के दुष्ट पुत्रों ने अभिमन्यु को मार डाला, उस समय महारथी अर्जुन वहाँ उपस्थित नहीं थे ॥ 41॥
 
Lord Krishna! When the evil-minded sons of Dhritarashtra killed Abhimanyu in the war, the mighty warrior Arjun was not present there at that time. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)