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mahabharat 7.183.4-5: संजय ने कहा - प्रजानाथ! कुरुवंश में श्रेष्ठ! प्रतिदिन रात्रि में युद्ध से लौटने के बाद हम लोग यही चर्चा करते थे - 'कर्ण! कल प्रातः होते ही तुम इस शक्ति का प्रयोग कृष्ण या अर्जुन पर करो।'   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  7.183.4-5 
संजय उवाच
संग्रामाद् विनिवृत्तानां सर्वेषां नो विशाम्पते।
रात्रौ कुरुकुलश्रेष्ठ मन्त्रोऽयं समजायत॥ ४॥
प्रभातमात्रे श्वोभूते केशवायार्जुनाय वा।
शक्तिरेषा हि मोक्तव्या कर्ण कर्णेति नित्यश:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - प्रजानाथ! कुरुवंश में श्रेष्ठ! प्रतिदिन रात्रि में युद्ध से लौटने के बाद हम लोग यही चर्चा करते थे - 'कर्ण! कल प्रातः होते ही तुम इस शक्ति का प्रयोग कृष्ण या अर्जुन पर करो।'
 
Sanjaya said - Prajanath! Best of the Kuru clan! Every day after returning from the battle at night we used to discuss this: 'Karna! As soon as tomorrow morning dawns you should use this power on Krishna or Arjun.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)