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mahabharat 7.183.38: ‘युद्ध में राक्षस घटोत्कच का वध करने के बाद द्रोण, कर्ण और राजा दुर्योधन हर्ष से गर्जना कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.183.38 
एष द्रोणश्च कर्णश्च राजा चैव सुयोधन:।
निहत्य राक्षसं युद्धे हृष्टा: नर्दन्ति संयुगे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘युद्ध में राक्षस घटोत्कच का वध करने के बाद द्रोण, कर्ण और राजा दुर्योधन हर्ष से गर्जना कर रहे हैं।
 
‘Drona, Karna and King Duryodhana are roaring with joy after killing the demon Ghatotkacha in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)