Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.183.32: प्रभु! युद्ध के आरंभ से ही इसने मेरी बहुत सहायता की है। इस महायुद्ध में इसने मेरे लिए अनेक कठिन कार्य संपन्न किए हैं।'   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.183.32 
आरम्भाच्चैव युद्धानां यदेष कृतवान् प्रभो।
मदर्थे दुष्करं कर्म कृतं तेन महाहवे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! युद्ध के आरंभ से ही इसने मेरी बहुत सहायता की है। इस महायुद्ध में इसने मेरे लिए अनेक कठिन कार्य संपन्न किए हैं।'
 
Prabhu! From the very beginning of the war it has helped me a lot. It has accomplished many difficult tasks for me in this great war.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)