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mahabharat 7.183.31: गंधमादन की यात्रा में उन्होंने हमें कई खतरों से बचाया। जब पांचाल राजकुमारी द्रौपदी थक गईं, तो उस विशालकाय योद्धा ने उन्हें अपनी पीठ पर उठा लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.183.31 
गन्धमादनयात्रायां दुर्गेभ्यश्च स्म तारिता:।
पाञ्चाली च परिश्रान्ता पृष्ठेनोढा महात्मना॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
गंधमादन की यात्रा में उन्होंने हमें कई खतरों से बचाया। जब पांचाल राजकुमारी द्रौपदी थक गईं, तो उस विशालकाय योद्धा ने उन्हें अपनी पीठ पर उठा लिया।
 
On the journey to Gandhamadana he saved us from many dangers. When Panchala princess Draupadi got tired, that huge warrior carried her on his back.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)