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mahabharat 7.183.25-26h: ‘राजन्! उठो और युद्ध करो। इस महायुद्ध का भारी उत्तरदायित्व उठाओ। प्रभु! यदि तुम भयभीत हो जाओगे, तो विजय प्राप्त होने में संदेह है।’॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.183.25-26h 
उत्तिष्ठ राजन् युद्धॺस्व वह गुर्वीं धुरं विभो॥ २५॥
त्वयि वैक्लव्यमापन्ने संशयो विजये भवेत्।
 
 
अनुवाद
‘राजन्! उठो और युद्ध करो। इस महायुद्ध का भारी उत्तरदायित्व उठाओ। प्रभु! यदि तुम भयभीत हो जाओगे, तो विजय प्राप्त होने में संदेह है।’॥25 1/2॥
 
‘King! Get up and fight. Take up the heavy responsibility of this great battle. Lord! If you get frightened, there is doubt in achieving victory.’॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)