Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.183.22-23: भीम की इस प्रकार आज्ञा पाकर राजा युधिष्ठिर अपने रथ पर बैठकर बार-बार विलाप करने लगे। उस समय उनके मुख से आँसुओं की धारा बह रही थी। कर्ण का पराक्रम देखकर वे अत्यन्त चिन्ताग्रस्त हो गए। | mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं भीमं समादिश्य स्वरथे समुपाविशत्॥ २२॥
अश्रुपूर्णमुखो राजा नि:श्वसंश्च पुन: पुन:।
कश्मलं प्राविशद् घोरं दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम्॥ २३॥
अनुवाद
भीम की इस प्रकार आज्ञा पाकर राजा युधिष्ठिर अपने रथ पर बैठकर बार-बार विलाप करने लगे। उस समय उनके मुख से आँसुओं की धारा बह रही थी। कर्ण का पराक्रम देखकर वे अत्यन्त चिन्ताग्रस्त हो गए।
Having thus ordered Bhima, King Yudhishthira sat on his chariot weeping repeatedly. At that time a stream of tears was flowing down his face. He was deeply worried after seeing the valour of Karna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥