Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.183.19-20: संजय ने कहा, "हे राजन! जब रात्रि में कर्ण द्वारा राक्षस घटोत्कच का वध हो गया, तब आपके सैनिक हर्ष में भरकर युद्ध की इच्छा से गर्जना करते हुए बड़े वेग से आक्रमण करने लगे और पाण्डव सेना का संहार होने लगा। उस समय घोर अन्धकारमय रात्रि में राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी और व्यथित हो गये। | mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय उवाच
हते घटोत्कचे राजन् कर्णेन निशि राक्षसे।
प्रणदत्सु च हृष्टेषु तावकेषु युयुत्सुषु॥ १९॥
आपतत्सु च वेगेन वध्यमाने बलेऽपि च।
विगाढायां रजन्यां च राजा दैन्यं परं गत:॥ २०॥
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! जब रात्रि में कर्ण द्वारा राक्षस घटोत्कच का वध हो गया, तब आपके सैनिक हर्ष में भरकर युद्ध की इच्छा से गर्जना करते हुए बड़े वेग से आक्रमण करने लगे और पाण्डव सेना का संहार होने लगा। उस समय घोर अन्धकारमय रात्रि में राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी और व्यथित हो गये।
Sanjaya said, "O King! When the demon Ghatotkacha was killed by Karna at night, your soldiers, filled with joy and roaring with the desire for war, attacked with great vigour and the Pandava army began to be killed. At that time, in the pitch-black night, King Yudhishthira became very sad and distressed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥