Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.183.13: आक्रमण करने में कुशल सृंजय और पांचालों ने अपनी सेना की व्यूह रचना करके द्रोणाचार्य पर किस प्रकार आक्रमण किया?॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.183.13 
ये च तेऽभ्यद्रवन् द्रोणं व्यूढानीका: प्रहारिण:।
सृञ्जया: सह पञ्चालैस्तेऽप्यकुर्वन् कथं रणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आक्रमण करने में कुशल सृंजय और पांचालों ने अपनी सेना की व्यूह रचना करके द्रोणाचार्य पर किस प्रकार आक्रमण किया?॥13॥
 
How did the Srinjayas and Panchalas, who were skilled in attacking, form the battle formation of their army and attack Dronacharya?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)