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mahabharat 7.183.10: धृतराष्ट्र बोले- संजय! निश्चय ही तुम देवताओं द्वारा मारे गए। श्रीकृष्ण की अपनी बुद्धि के प्रभाव से घटोत्कच को तिनके के समान मारकर इन्द्र की शक्ति चली गई। 10॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.183.10 
धृतराष्ट्र उवाच
दैवेनोपहता यूयं स्वबुद्धॺा केशवस्य च।
गता हि वासवी हत्वा तृणभूतं घटोत्कचम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! निश्चय ही तुम देवताओं द्वारा मारे गए। श्रीकृष्ण की अपनी बुद्धि के प्रभाव से घटोत्कच को तिनके के समान मारकर इन्द्र की शक्ति चली गई। 10॥
 
Dhritarashtra said – Sanjay! Certainly you were killed by the gods. With the help of Shri Krishna's own wisdom, the power of Indra went away after killing Ghatotkacha like a straw. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)