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mahabharat 7.183.1-3: धृतराष्ट्र बोले, "संजय महाराज! कर्ण, दुर्योधन, सुबलपुत्र शकुनिक और विशेषतः आप इस विषय में महान अन्याय कर रहे हैं। यदि आप जानते थे कि यह शक्ति युद्धभूमि में सदैव एक ही योद्धा को मार सकती है और इन्द्र सहित समस्त देवता न तो इसे रोक सकते हैं और न इसका प्रहार सहन कर सकते हैं, तो आपके कहने पर युद्ध आरम्भ होने पर कर्ण ने इस शक्ति का प्रयोग देवकीनन्दन श्रीकृष्ण या अर्जुन पर क्यों नहीं किया?"॥1-3॥   |   mahabharat अध्याय 7.183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 183: धृतराष्ट्रका पश्चात्ताप, संजयका उत्तर एवं राजा युधिष्ठिरका शोक और भगवान् श्रीकृष्ण तथा महर्षि व्यासद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 1-3
 
 
श्लोक  7.183.1-3 
धृतराष्ट्र उवाच
कर्णदुर्योधनादीनां शकुने: सौबलस्य च।
अपनीतं महत् तात तव चैव विशेषत:॥ १॥
यदि जानीथ तां शक्तिमेकघ्नीं सततं रणे।
अनिवार्यामसह्यां च देवैरपि सवासवै:॥ २॥
सा किमर्थं तु कर्णेन प्रवृत्ते समरे पुरा।
न देवकीसुते मुक्ता फाल्गुने वापि संजय॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय महाराज! कर्ण, दुर्योधन, सुबलपुत्र शकुनिक और विशेषतः आप इस विषय में महान अन्याय कर रहे हैं। यदि आप जानते थे कि यह शक्ति युद्धभूमि में सदैव एक ही योद्धा को मार सकती है और इन्द्र सहित समस्त देवता न तो इसे रोक सकते हैं और न इसका प्रहार सहन कर सकते हैं, तो आपके कहने पर युद्ध आरम्भ होने पर कर्ण ने इस शक्ति का प्रयोग देवकीनन्दन श्रीकृष्ण या अर्जुन पर क्यों नहीं किया?"॥1-3॥
 
Dhritarashtra said, "Sir Sanjaya! Karna, Duryodhan, Subalaputra Shakunika and especially you are doing a great injustice in this matter. If you knew that this power can always kill only one warrior on the battlefield and all the gods including Indra can neither stop it nor bear its blow, then why did Karna not use this power on Devakinandan Sri Krishna or Arjuna when the war started on your suggestion?"॥1-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)