Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.182.47: संजय कहते हैं- महाराज! इस प्रकार अर्जुन के हित में लगे रहने वाले और उसके प्रिय मार्ग में सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भगवान देवकीनन्दन ने उस समय सत्य से यह बात कही थी॥47॥ | mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय कहते हैं- महाराज! इस प्रकार अर्जुन के हित में लगे रहने वाले और उसके प्रिय मार्ग में सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भगवान देवकीनन्दन ने उस समय सत्य से यह बात कही थी॥47॥
Sanjay says- Maharaj! In this way, Lord Devkinandan, who was engaged in the welfare of Arjun and was always ready to help him in his favorite way, had said this to Satya at that time. 47॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे कृष्णवाक्ये द्वॺशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके समय श्रीकृष्णवाक्यविषयक एक सौ बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥