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mahabharat 7.182.44: सत्यके! यदि तीनों लोकों के राज्य से भी अधिक दुर्लभ कोई वस्तु है, तो मैं उसे कुन्तीनन्दन अर्जुन के बिना प्राप्त नहीं करना चाहता। 44॥   |   mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.182.44 
त्रैलोक्यराज्याद् यत् किंचिद् भवेदन्यत् सुदुर्लभम्।
नेच्छेयं सात्वताहं तद् विना पार्थं धनंजयम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
सत्यके! यदि तीनों लोकों के राज्य से भी अधिक दुर्लभ कोई वस्तु है, तो मैं उसे कुन्तीनन्दन अर्जुन के बिना प्राप्त नहीं करना चाहता। 44॥
 
Satyake! If there is something more rare than the kingdom of the three worlds, then I do not want to get it without Kuntinandan Arjun. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)