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mahabharat 7.182.41: हे वीर! वह शक्ति अर्जुन के लिए मृत्यु स्वरूप है, इसी चिंता में निरन्तर डूबे रहने के कारण मुझे न तो नींद आती थी और न ही कभी मन में हर्ष उत्पन्न होता था।   |   mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.182.41 
फाल्गुनस्य हि सा मृत्युरिति चिन्तयतोऽनिशम्।
न निद्रा न च मे हर्षो मनसोऽस्ति युधां वर॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! वह शक्ति अर्जुन के लिए मृत्यु स्वरूप है, इसी चिंता में निरन्तर डूबे रहने के कारण मुझे न तो नींद आती थी और न ही कभी मन में हर्ष उत्पन्न होता था।
 
Brave! That Shakti is the form of death for Arjun, due to being continuously immersed in this worry, I neither could sleep nor did joy ever arise in my mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)