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फाल्गुनस्य हि सा मृत्युरिति चिन्तयतोऽनिशम्।
न निद्रा न च मे हर्षो मनसोऽस्ति युधां वर॥ ४१॥
अनुवाद
हे वीर! वह शक्ति अर्जुन के लिए मृत्यु स्वरूप है, इसी चिंता में निरन्तर डूबे रहने के कारण मुझे न तो नींद आती थी और न ही कभी मन में हर्ष उत्पन्न होता था।
Brave! That Shakti is the form of death for Arjun, due to being continuously immersed in this worry, I neither could sleep nor did joy ever arise in my mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥