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mahabharat 7.182.37-38: क्योंकि देवताओं में इन्द्र के समान पाण्डवों में अर्जुन ही सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यदि अर्जुन मारा गया तो सृंज्य सहित पाण्डव अग्निरहित देवताओं के समान मृत हो जाएँगे। ।37-38॥   |   mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  7.182.37-38 
स हि तेषामतियशा देवानामिव वासव:॥ ३७॥
तस्मिन् विनिहते पार्थे पाण्डवा: सृञ्जयै: सह।
भविष्यन्ति गतात्मान: सुरा इव निरग्नय:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि देवताओं में इन्द्र के समान पाण्डवों में अर्जुन ही सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यदि अर्जुन मारा गया तो सृंज्य सहित पाण्डव अग्निरहित देवताओं के समान मृत हो जाएँगे। ।37-38॥
 
Because among the gods, like Indra, among the Pandavas, Arjun is the most famous. If Arjuna is killed, the Pandavas along with Srinjya will become as dead as gods devoid of fire. .37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)