अयं च प्रत्यय: कर्णे शक्तिश्चामितविक्रमा।
किमर्थं सूतपुत्रेण न मुक्ता फाल्गुने तु सा॥ ३४॥
अनुवाद
भगवन्! कर्ण को उस शक्ति के बल पर विश्वास था। वह दिव्य शक्ति जो अपार पराक्रम दिखा सकती थी, उसके हाथों में विद्यमान थी, फिर भी सारथीपुत्र ने उसका प्रयोग अर्जुन पर क्यों नहीं किया?'॥34॥
‘Lord! Karna had faith in the power of that power. That divine power which could show immense prowess was present in his hands, yet how did the son of a charioteer not use it on Arjun?’॥ 34॥