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mahabharat 7.182.32: यदि मैं ध्यानपूर्वक विचार करूँ, तो तीनों लोकों में ऐसा कोई वीर पुरुष नहीं है, जो शत्रुओं का दमन करने वाले चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण को परास्त कर सके॥32॥   |   mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.182.32 
परिचिन्त्य तु पश्यामि चक्रायुधमरिंदमम्।
न सोऽस्ति त्रिषु लोकेषु यो जयेत जनार्दनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं ध्यानपूर्वक विचार करूँ, तो तीनों लोकों में ऐसा कोई वीर पुरुष नहीं है, जो शत्रुओं का दमन करने वाले चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण को परास्त कर सके॥32॥
 
If I think carefully about it, there is no such brave man available in the three worlds who can defeat Lord Krishna, the discus wielder who suppresses the enemies. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)