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mahabharat 7.182.28: ऐसा निश्चय करके भी जब वह युद्ध के समय सदैव सावधान रहने वाले सनातन परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के समीप जाता तो मोहित हो जाता था ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.182.28 
सा तु बुद्धि: कृताप्येवं जाग्रति त्रिदशेश्वरे।
अप्रमेये हृषीकेशे युद्धकालेऽप्यमुह्यत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा निश्चय करके भी जब वह युद्ध के समय सदैव सावधान रहने वाले सनातन परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के समीप जाता तो मोहित हो जाता था ॥28॥
 
Even after taking such a decision, whenever he went near Lord Shri Krishna, the eternal God, who was always alert during the war, he was fascinated. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)