श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.182.25 
तस्मात् पर्णानि शाखाश्च स्कन्धं चोत्सृज्य सूतज।
कृष्णं हि विद्धि पाण्डूनां मूलं सर्वत्र सर्वदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अतः हे सूतनंदन! तुम पत्तों, शाखाओं और तने को छोड़कर मूल को काट डालो। श्रीकृष्ण को सर्वत्र और सर्वदा पाण्डवों का मूल समझो।॥25॥
 
‘Therefore, Sutanandan! You should cut the root leaving the leaves, branches and the trunk. Consider Shri Krishna as the root of the Pandavas everywhere and always.’॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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