श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  7.182.20-21 
संजय उवाच
दुर्योधनस्य शकुनेर्मम दु:शासनस्य च।
रात्रौ रात्रौ भवत्येषा नित्यमेव समर्थना॥ २०॥
श्व: सर्वसैन्यान्युत्सृज्य जहि कर्ण धनंजयम्।
प्रेष्यवत् पाण्डुपञ्चालानुपभोक्ष्यामहे तत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- हे राजन! प्रतिदिन रात्रि में दुर्योधन, शकुनि, दु:शासन और मैं भी कर्ण से प्रार्थना करते थे कि 'कर्ण! कल प्रातःकाल तुम समस्त सेनाओं को छोड़कर अर्जुन का वध कर दो। तब हम पाण्डवों और पांचालों के साथ सेवकों जैसा व्यवहार करेंगे।'
 
Sanjaya said- O King! Every night Duryodhan, Shakuni, Dushasan and I too used to request Karna that 'Karna! Tomorrow morning you leave all the armies and kill Arjun. Then we will treat the Pandavas and Panchalas like servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)