Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.182.17: धृतराष्ट्र बोले - संजय ! मेरा पुत्र दुर्योधन सबके विरुद्ध है और अपने को सबसे बुद्धिमान समझता है। उसके मंत्री भी अच्छे नहीं हैं; इसीलिए अर्जुन को मारकर विजय प्राप्त करने का यह अचूक उपाय उसके हाथ से निकल गया है॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 7.182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
विरोधी च कुमन्त्री च प्राज्ञमानी ममात्मज:।
यस्यैव समतिक्रान्तो वधोपायो जयं प्रति॥ १७॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय ! मेरा पुत्र दुर्योधन सबके विरुद्ध है और अपने को सबसे बुद्धिमान समझता है। उसके मंत्री भी अच्छे नहीं हैं; इसीलिए अर्जुन को मारकर विजय प्राप्त करने का यह अचूक उपाय उसके हाथ से निकल गया है॥ 17॥
Dhritarashtra said - Sanjay! My son Duryodhan is against everyone and considers himself to be the most intelligent. His ministers are also not good; that is why this infallible means of killing Arjun and gaining victory has slipped out of his hands.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥