श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.182.15 
तैस्तैरुपायैर्बहुभी रक्ष्यमाण: स पार्थिव।
जयत्यभिमुख: शत्रून् पार्थ: कृष्णेन पालित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजन! श्रीकृष्ण द्वारा विविध उपायों से रक्षित होकर ही अर्जुन युद्ध में शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं।
 
Rajan! It is only by being protected by Shri Krishna through various measures that Arjuna gets victory over his enemies in the battle. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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