श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  7.182.11-12 
संजय उवाच
एतच्चिकीर्षितं ज्ञात्वा कर्णस्य मधुसूदन:।
नियोजयामास तदा द्वैरथे राक्षसेश्वरम्॥ ११॥
घटोत्कचं महावीर्यं महाबुद्धिर्जनार्दन:।
अमोघाया विघातार्थं राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- राजन! कर्ण भी उस शक्ति से अर्जुन को मारना चाहता था। उसका अभिप्राय जानकर परम बुद्धिमान मधुसूदन भगवान श्रीकृष्ण ने उस अमोघ शक्ति को नष्ट करने के लिए महाबली राक्षसराज घटोत्कच को कर्ण के साथ द्वन्द्वयुद्ध में लगा दिया। महाराज! यह सब आपकी कुमन्त्रणा का ही फल है। 11-12॥
 
Sanjay said- Rajan! Karna also wanted to kill Arjun with that power. Knowing his intention, the most intelligent Madhusudan Lord Shri Krishna engaged the mighty demon king Ghatotkacha in a dual battle with Karna to destroy that infallible power. Maharaj! All this is the result of your evil advice. 11-12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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