श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.181.18 
स तु बद्धाङ्गुलित्राणो नैषादिर्दृढविक्रम:।
अतिमानी वनचरो बभौ राम इवापर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त अभिमानी तथा पराक्रमी एकलव्य जब हाथों में दस्ताने पहनकर वन में विचरण करता था, तब वह दूसरा परशुराम प्रतीत होता था।
 
When Eklavya, who was extremely proud and endowed with great valour, used to roam about in the forest wearing gloves on his hands, he appeared like another Parasurama. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)