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mahabharat 7.180.4: तत्पश्चात्, बुद्धिमान् भगवान श्रीकृष्ण रथ के पिछले भाग में बैठे हुए अर्जुन को बार-बार हृदय से लगाकर जोर से गर्जना करने लगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.180.4 
तत: परिष्वज्य पुन: पार्थमास्फोट्य चासकृत्।
रथोपस्थगतो धीमान् प्राणदत् पुनरच्युत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, बुद्धिमान् भगवान श्रीकृष्ण रथ के पिछले भाग में बैठे हुए अर्जुन को बार-बार हृदय से लगाकर जोर से गर्जना करने लगे॥4॥
 
Thereafter, the wise Lord Krishna, sitting at the rear of the chariot, hugged Arjun again and again and again and again, started roaring loudly. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)