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mahabharat 7.180.3: जोर से गरजते हुए उन्होंने घोड़ों को रोक दिया और खुशी से नाचने लगे, हवा से हिलते हुए पेड़ की तरह झूमने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.180.3 
स विनद्य महानादमभीषून् संनियम्य च।
ननर्त हर्षसंवीतो वातोद्‍धूत इव द्रुम:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जोर से गरजते हुए उन्होंने घोड़ों को रोक दिया और खुशी से नाचने लगे, हवा से हिलते हुए पेड़ की तरह झूमने लगे।
 
Roaring loudly, they stopped the horses and began to dance in joy, swaying like a tree shaken by the wind. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)