Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.180.21-22: हे महाबली! जब से महाबली इन्द्र ने कर्ण को उसके दिव्य कवच और कुण्डल के बदले में अपनी शक्ति दी थी, जिनका प्रयोग उसने घटोत्कच पर किया था, तब से धर्मात्मा कर्ण सदैव यह मानता था कि आप युद्धभूमि में मारे गए हैं। ॥ 21-22॥ | mahabharat अध्याय 7.180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महाबली! जब से महाबली इन्द्र ने कर्ण को उसके दिव्य कवच और कुण्डल के बदले में अपनी शक्ति दी थी, जिनका प्रयोग उसने घटोत्कच पर किया था, तब से धर्मात्मा कर्ण सदैव यह मानता था कि आप युद्धभूमि में मारे गए हैं। ॥ 21-22॥
O mighty one! Ever since the great Indra had given Karna his power in exchange for his divine armour and earrings, which he had used on Ghatotkacha, the righteous Karna had always believed that you had been killed on the battlefield. ॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥