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mahabharat 7.180.2: परन्तु वसुदेवपुत्र भगवान कृष्ण हर्ष से भर गए और गर्जना करने लगे। उन्होंने अर्जुन को गले लगा लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 180: घटोत्कचके वधसे पाण्डवोंका शोक तथा श्रीकृष्णकी प्रसन्नता और उसका कारण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.180.2 
वासुदेवस्तु हर्षेण महताभिपरिप्लुत:।
ननाद सिंहनादं वै पर्यष्वजत फाल्गुनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वसुदेवपुत्र भगवान कृष्ण हर्ष से भर गए और गर्जना करने लगे। उन्होंने अर्जुन को गले लगा लिया।
 
But Lord Krishna, the son of Vasudeva, was filled with joy and began to roar. He embraced Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)