Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.18.d1: हे भरतश्रेष्ठ! वह स्थिर सेना ऐसी शोभा पा रही थी, मानो उसे कुशल कलाकारों ने चित्र बनाकर चित्रित किया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  7.18.d1 
(सा सेना भरतश्रेष्ठ निश्चेष्टा शुशुभे तदा।
चित्रे पटे यथा न्यस्ता कुशलै: शिल्पिभिर्नरै:॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह स्थिर सेना ऐसी शोभा पा रही थी, मानो उसे कुशल कलाकारों ने चित्र बनाकर चित्रित किया हो।
 
O best of the Bharatas! That motionless army was decorated as if it had been painted on a screen by skilled artists.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)