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mahabharat 7.18.6: अथवा इसमें संदेह नहीं कि यह त्रिगर्तों के लिए आनन्द का अवसर है, क्योंकि वे उत्तम लोकों में जाएँगे, जहाँ दुष्ट पुरुषों का पहुँचना कठिन है।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.18.6 
अथवा हर्षकालोऽयं त्रैगर्तानामसंशयम्।
कुनरैर्दुरवापान् हि लोकान् प्राप्स्यन्त्यनुत्तमान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अथवा इसमें संदेह नहीं कि यह त्रिगर्तों के लिए आनन्द का अवसर है, क्योंकि वे उत्तम लोकों में जाएँगे, जहाँ दुष्ट पुरुषों का पहुँचना कठिन है।॥6॥
 
Or there is no doubt that this is an occasion of joy for the Trigartas because they will go to the best of the worlds, which are difficult for evil men to reach.' ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)