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mahabharat 7.18.31: तब नारायणी सेना के सभी संशप्तक और ग्वालगण मृत्यु को युद्ध से निवृत्त होने का अवसर समझकर पुनः लौट आए ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.18.31 
ततस्ते संन्यवर्तन्त संशप्तकगणा: पुन:।
नारायणाश्च गोपाला मृत्युं कृत्वा निवर्तनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तब नारायणी सेना के सभी संशप्तक और ग्वालगण मृत्यु को युद्ध से निवृत्त होने का अवसर समझकर पुनः लौट आए ॥31॥
 
Then all the Sanshaptakas and the cowherds of the Narayani army considered death as an opportunity to retire from the war and came back again. ॥ 31॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि सुधन्ववधे अष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें सुधन्वाका वधविषयक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३३ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)