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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.18.3 
स शब्द: प्रदिश: सर्वा दिश: खं च समावृणोत्।
आवृतत्वाच्च लोकस्य नासीत् तत्र प्रतिस्वन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह गर्जना समस्त दिशाओं, दिशाओं और आकाश में व्याप्त हो गई। चूँकि सारा जगत इसी प्रकार व्याप्त था, इसलिए वहाँ कोई अन्य गूँज नहीं थी।
 
That roar pervaded all directions, all directions and the sky. Since the whole world was pervaded in this manner, there was no other echo there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)