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mahabharat 7.18.24: तब इन्द्र के पुत्र अर्जुन ने क्रोध में भरकर बाणों की अविच्छिन्न वर्षा से उस विशाल सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया, जैसे सूर्यदेव अपनी किरणों से महान अंधकार को नष्ट कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.18.24 
ततो जघान संक्रुद्धो वासविस्तां महाचमूम्।
शरजालैरविच्छिन्नैस्तम: सूर्य इवांशुभि:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र के पुत्र अर्जुन ने क्रोध में भरकर बाणों की अविच्छिन्न वर्षा से उस विशाल सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया, जैसे सूर्यदेव अपनी किरणों से महान अंधकार को नष्ट कर देते हैं।
 
Then Arjuna, the son of Indra, filled with anger, began destroying that huge army with an uninterrupted shower of arrows, just as the Sun God destroys great darkness with his rays. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)