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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 18: संशप्तक-सेनाओंके साथ अर्जुनका युद्ध और सुधन्वाका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.18.11 
उपलभ्य तत: संज्ञामवस्थाप्य च वाहिनीम्।
युगपत् पाण्डुपुत्राय चिक्षिपु: कङ्कपत्रिण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् होश में आने पर संशप्तकों ने अपनी सेना को स्थिर किया और साथ ही पाण्डवपुत्र अर्जुन पर कंक पक्षी के पंख वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
After regaining consciousness after some time, the Samshaptakas stabilised their army and simultaneously started showering arrows having the wings of the Kanka bird on Arjun, son of Pandava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)