| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 179: घटोत्कचका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा चलायी हुई इन्द्रप्रदत्त शक्तिसे उसका वध » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 7.179.23  | नैवाददानो न च संदधानो
न चेषुधी: स्पृश्यमान: कराग्रै:।
अदृश्यद् वै लाघवात् सूतपुत्र:
सर्वं बाणैश्छादयानोऽन्तरिक्षम्॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | जब सारथिपुत्र कर्ण अपने बाणों द्वारा वेगपूर्वक सम्पूर्ण आकाश को आच्छादित कर रहा था, तब वह कब अपनी अंगुलियों से तरकश को छूता, कब बाण निकालता और कब उसे धनुष पर चढ़ाता, यह दिखाई नहीं देता था॥ 23॥ | | | | When Karna, the son of a charioteer, was rapidly covering the entire sky with his arrows, it was not visible when he touched the quiver with his fingers, when he took out an arrow and when he placed it on the bow.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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