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श्लोक 7.179.20  |
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिन्नन्तर्हिते तूर्णं कूटयोधिनि राक्षसे।
मामकै: प्रतिपन्नं यत् तन्ममाचक्ष्व संजय॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! यह बताओ कि जब माया से युद्ध करने वाला वह राक्षस अचानक अदृश्य हो गया, तब मेरे पुत्रों ने क्या सोचा और क्या किया?॥ 20॥ |
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| Dhritarashtra asked - Sanjay! Tell me, what did my sons think and do when that demon fighting with illusion suddenly disappeared?॥ 20॥ |
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